रेलवे भर्ती परीक्षा में AI कैमरों का कमाल, पकड़े गए 7 मुन्नाभाई

उत्तर रेलवे के अंबाला में शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान एआई कैमरों की मदद से फर्जीवाड़ा करते हुए मुन्नाभाई पकड़े गए।
भारतीय रेलवे की भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और शुचिता लाने के लिए इस बार अत्याधुनिक तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। उत्तर रेलवे के अंबाला छावनी स्थित रेलवे स्टेडियम में इन दिनों शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान रेलवे ने भर्ती परीक्षा में पहली बार एआई (AI) कैमरों और बायोमीट्रिक मिलान की मदद से एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। परीक्षा के दौरान महज तीन दिनों के भीतर सात 'मुन्नाभाई' यानी सॉल्वर धरे जा चुके हैं, जबकि दो आरोपी मौके से फरार होने में कामयाब रहे। ये सभी असली अभ्यर्थियों के स्थान पर धोखे से दौड़ प्रतियोगिता में शामिल हुए थे। लगातार सामने आ रहे इन मामलों से रेलवे विभाग और भर्ती बोर्ड में हड़कंप मच गया है। फिलहाल दो मुख्य आरोपियों के खिलाफ कड़े कानूनी प्रावधानों के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है, जबकि अन्य मामलों में गहन जांच जारी है।
AI कैमरों और बायोमीट्रिक चेकिंग से हुआ बड़ा खुलासा
मंडल कार्यालय अंबाला छावनी के वरिष्ठ अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, रेलवे भर्ती प्रकोष्ठ (RRC) की ओर से 22 सितंबर से 28 सितंबर 2026 तक शारीरिक दक्षता परीक्षा का चरणबद्ध आयोजन किया जा रहा है। इस परीक्षा प्रक्रिया के तहत अभ्यर्थियों को 35 किलोग्राम वजन उठाकर 100 मीटर की दूरी तय करनी होती है और साथ ही 1000 मीटर की दौड़ भी लगानी होती है।
इस पूरी शारीरिक प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक विशेष प्राइवेट एजेंसी के एआई कैमरों और आधुनिक बॉयोमीट्रिक उपकरणों की मदद ली जा रही है। इन्हीं हाई-टेक कैमरों के डेटा और फिंगरप्रिंट मिलान के दौरान 24 सितंबर को एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया। जांच के दौरान पहला मामला राजस्थान के अलवर के नजदीक रूपबास गांव निवासी गिरराज मीना का सामने आया, जो अंबाला में किसी अन्य की जगह परीक्षा देने पहुंचा था।
अलग-अलग शहरों और तारीखों में दे चुके थे परीक्षा
जांच-पड़ताल में यह सनसनीखेज तथ्य सामने आया कि आरोपी गिरराज मीना इससे पहले 5 सितंबर 2026 को नागपुर में राहुल मीना नामक मूल उम्मीदवार के नाम पर भी शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल हो चुका था। जब पुलिस और अधिकारियों ने उससे कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने स्वीकार किया कि राहुल मीना उसकी बुआ का लड़का है, जिसकी जगह वह सॉल्वर बनकर बैठा था।
इसी प्रकार, दूसरे मामले में उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद स्थित शाहपुर गांव का रहने वाला संदीप कुमार यादव भी एआई चेकिंग की पैनी नजर से बच नहीं सका। जब अधिकारियों ने उसका डिजिटल रिकॉर्ड खंगाला, तो पता चला कि इसी26 सितंबर 2026 को उसने रतलाम (मध्य प्रदेश) में अपने रिश्तेदार अभिषेक की जगह पर भी परीक्षा पास करने के लिए दौड़ लगाई थी।
इसके अलावा, एक अन्य चौंकाने वाला मामला तब सामने आया जब हिसार की जाखल रेलवे कॉलोनी के रहने वाले सतीश का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। शुरुआती जांच में पता चला कि सतीश ने 22 सितंबर को अपने दोस्त दीपक के स्थान पर परीक्षा दी थी। इसके अगले ही दिन यानी 23 सितंबर को वह अपनी खुद की परीक्षा देने के लिए केंद्र पर पहुंचा, जहां एआई कैमरों ने उसका पुराना डेटा पकड़ लिया। भेद खुलते ही सतीश मौके से ही फरार हो गया, जिसकी तलाश पुलिस सरगर्मी से कर रही है।
रेलवे प्रशासन सख्त: तीन नए संदिग्ध काबू और एफआईआर दर्ज
भर्ती प्रक्रिया में इस तरह के सुनियोजित फर्जीवाड़े को गंभीरता से लेते हुए मंडल रेल प्रबंधक (DRM) अंबाला द्वारा गठित तीन वरिष्ठ अधिकारियों की उच्चस्तरीय समिति तुरंत हरकत में आ गई। सेंटर इंचार्ज सह वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी के दिशा-निर्देशों के तहत समिति के सदस्य व सहायक कार्मिक अधिकारी सुरेश कुमार ने पड़ाव थाना पुलिस को लिखित शिकायत पत्र सौंपा और सख्त धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की मांग की।
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उत्तर रेलवे के सहायक कार्मिक अधिकारी सुरेश कुमार की शिकायत के आधार पर पड़ाव थाना पुलिस ने छल, प्रतिरूपण (Impersonation) और धोखाधड़ी से जुड़े गंभीर मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 319(2) और 318(4) के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। पड़ाव थाना प्रभारी प्रवीण आर्य ने मीडिया को बताया कि आरोपी सतीश 22 सितंबर को अभ्यर्थी दीपक के स्थान पर बैठा था और 23 सितंबर को फिर से पकड़ा गया। पुलिस ने रेलवे से दोनों अभ्यर्थियों का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड तलब किया है। चूंकि इस गिरोह से जुड़े कुछ मामलों का घटनास्थल रतलाम भी है, इसलिए वहां के लिए भी आवश्यक दस्तावेज और डीडीआर (DDR) भेजी जा रही है।
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