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गुरुवार, 3 सितंबर 2026
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द ओलिव स्कूल, ठोल में CBSE क्लस्टर-16 खो-खो चैंपियनशिप का भव्य समापन, 28 टीमों ने दिखाया दमखम

कुरुक्षेत्र|विशेष संवाददाता
द ओलिव स्कूल, ठोल में CBSE क्लस्टर-16 खो-खो चैंपियनशिप का भव्य समापन, 28 टीमों ने दिखाया दमखम

📸 सांकेतिक तस्वीर | फोटो: latestnewsharyana News 24

ठोल (कुरुक्षेत्र), 26 जुलाई। द ओलिव स्कूल, ठोल में आयोजित तीन दिवसीय सीबीएसई क्लस्टर-16 बालक खो-खो चैंपियनशिप 2026 का रविवार को भव्य समापन हुआ। 24 से 26 जुलाई तक चली इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़ सहित विभिन्न राज्यों की 28 टीमों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों ने अनुशासन, टीमवर्क और उत्कृष्ट खेल भावना का परिचय देते हुए शानदार प्रदर्शन किया।समापन समारोह में खो-खो इंडिया के सलाहकार सुरेश शर्मा, खो-खो इंडिया रेफरी बोर्ड के चेयरमैन मनीष जोशी, हरियाणा रेफरी बोर्ड के सदस्य एवं पूर्व एईओ मोहिंदर सिंह तथा तकनीकी अधिकारी शमशेर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। अतिथियों ने खिलाड़ियों को सम्मानित करते हुए कहा कि खेल केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का सशक्त माध्यम हैं।विद्यालय की चेयरपर्सन सरिता मनुजा, निदेशक के.एल. मनुजा तथा प्राचार्या सुनीता रानी ने सभी विजेता एवं प्रतिभागी टीमों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि खेल विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन और टीम भावना को मजबूत बनाते हैं तथा ऐसे आयोजन राष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का मंच प्रदान करते हैं।प्रतियोगिता के सफल संचालन में विद्यालय के कोच राजेंद्र एवं दिनेश की अहम भूमिका रही। इसके अलावा नवीन, मुकेश, सविता, मुस्कान, रविंदर, अनिल, रणदीप, मनीष और विशाल सहित पूरे खेल विभाग एवं विद्यालय परिवार के सहयोग की सराहना की गई।प्रतियोगिता परिणामअंडर-14 बालक वर्गप्रथम: शारदा पब्लिक स्कूल, फतेहाबादद्वितीय: सर जवाहर सिंह पब्लिक स्कूल, मुस्तफाबादसंयुक्त तृतीय: आर.एस. विद्यापीठ, हिसार एवं महर्षि दयानंद विद्यालय, चंडीगढ़अंडर-17 बालक वर्गप्रथम: नरार अंचल, कैथलद्वितीय: रॉयल इंटरनेशनल स्कूल, खराखेड़ीसंयुक्त तृतीय: शारदा पब्लिक स्कूल, फतेहाबाद एवं आरकेआईएस, हिमाचल प्रदेशअंडर-19 बालक वर्गप्रथम: खारिया पब्लिक स्कूल, सिरसाद्वितीय: एंजेल पब्लिक स्कूल, अंबालासंयुक्त तृतीय: गुरु नानक पब्लिक स्कूल, पांवटा साहिब एवं महर्षि दयानंद विद्यालय, चंडीगढ़समापन समारोह में विजेता टीमों को ट्रॉफियां एवं सम्मान प्रदान किए गए। विद्यालय प्रबंधन ने सभी प्रतिभागी विद्यालयों, अधिकारियों, रेफरियों, कोचों और सहयोगी स्टाफ का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं के सफल आयोजन का संकल्प दोहराया।

राष्ट्रीय

आखिर क्यों खड़गे के बोलते ही राज्यसभा हुई स्थगित? जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली|विशेष संवाददाता
आखिर क्यों खड़गे के बोलते ही राज्यसभा हुई स्थगित? जानिए पूरा मामला

संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे छात्रों पर कथित लाठीचार्ज का मुद्दा उठा रहे थे। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के चलते सदन में शोर-शराबा बढ़ गया, जिसके बाद कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों के साथ हुई कार्रवाई पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश की और मामले पर विस्तृत चर्चा की मांग की। वहीं, सत्ता पक्ष की ओर से विपक्ष के आरोपों का विरोध किया गया। दोनों पक्षों के बीच लगातार हंगामा और नारेबाजी होने लगी, जिससे सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। स्थिति को देखते हुए सभापति ने व्यवस्था बनाए रखने की अपील की, लेकिन शोर-शराबा जारी रहने पर राज्यसभा की कार्यवाही को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया। संसद के मानसून सत्र में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। विपक्ष जहां छात्रों के मुद्दे पर सरकार को घेरने में जुटा है, वहीं सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों पर आवश्यक कार्रवाई की गई है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि संसद में इस मुद्दे पर आगे क्या चर्चा होती है और क्या सरकार विपक्ष की मांगों पर विस्तृत जवाब देती है।

राजनीति

आखिर क्यों बंद किए गए 17 मेट्रो स्टेशन? जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली|विशेष संवाददाता
आखिर क्यों बंद किए गए 17 मेट्रो स्टेशन? जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने 17 मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद रखने का फैसला किया है। इस निर्णय के बाद रोजाना मेट्रो से सफर करने वाले हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जानकारी के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों की सलाह और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। जिन स्टेशनों को बंद किया गया है, वहां फिलहाल यात्रियों की एंट्री और एग्जिट पर रोक रहेगी। हालांकि, आवश्यकता के अनुसार कुछ रूटों पर मेट्रो ट्रेनें बिना रुके गुजर सकती हैं। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा शुरू करने से पहले आधिकारिक अपडेट जरूर जांच लें और वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें। सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद ही स्टेशनों को दोबारा खोलने का निर्णय लिया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह एहतियात के तौर पर लिया गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। यात्रियों से सहयोग की अपील करते हुए अधिकारियों ने अफवाहों से दूर रहने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने को कहा है। फिलहाल, सभी की नजरें इस बात पर हैं कि हालात सामान्य होने के बाद इन 17 मेट्रो स्टेशनों को कब दोबारा खोला जाएगा।

राष्ट्रीय

आखिर क्यों सोमन वांगचुक ने तोड़ा अनशन? सामने आई बड़ी वजह

नई दिल्ली|विशेष संवाददाता
आखिर क्यों सोमन वांगचुक ने तोड़ा अनशन? सामने आई बड़ी वजह

सोमन वांगचुक ने अनशन तोड़ा, आंदोलन के अगले चरण का किया ऐलान नई दिल्ली। पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोमन वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। लंबे समय से चल रहे उनके शांतिपूर्ण आंदोलन का उद्देश्य लद्दाख से जुड़े विभिन्न मुद्दों, पर्यावरण संरक्षण और संवैधानिक मांगों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना रहा। अनशन समाप्त करने के बाद सोमन वांगचुक ने कहा कि यह आंदोलन का अंत नहीं, बल्कि एक नए चरण की शुरुआत है। उन्होंने अपने समर्थकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि देशभर से मिले सहयोग ने इस अभियान को नई ऊर्जा दी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी और जल्द सकारात्मक कदम उठाएगी। वांगचुक ने कहा कि उनका संघर्ष पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा। उन्होंने युवाओं से पर्यावरण संरक्षण और जनहित के मुद्दों पर जागरूक रहने तथा संवैधानिक तरीकों से अपनी आवाज़ उठाने की अपील की। इस दौरान बड़ी संख्या में समर्थक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। अनशन समाप्त होने के बाद समर्थकों ने खुशी जताई, वहीं आंदोलन से जुड़े लोगों ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक उनका अभियान विभिन्न रूपों में जारी रहेगा। सोमन वांगचुक का यह आंदोलन पिछले कुछ समय से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ था। उनके अनशन और उससे जुड़े मुद्दों को लेकर देशभर में लगातार बहस होती रही। अब सभी की निगाहें सरकार की आगामी प्रतिक्रिया और आंदोलन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

राष्ट्रीय

कब मिलेगा अतिरिक्त वेतन वृद्धि का लाभ? DEO के साथ हेमसा की बैठक में हुआ बड़ा फैसला

हरियाणा|विशेष संवाददाता
कब मिलेगा अतिरिक्त वेतन वृद्धि का लाभ? DEO के साथ हेमसा की बैठक में हुआ बड़ा फैसला

भिवानी, 23 जुलाई 2026। सर्व कर्मचारी संघ से संबद्ध हरियाणा एजुकेशन मिनिस्ट्रीयल स्टाफ एसोसिएशन (हेमसा) के जिला प्रतिनिधिमंडल ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) निर्मल दहिया के साथ बैठक कर लंबित वेतन निर्धारण और अतिरिक्त वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। हेमसा के जिला प्रधान सुकेश कुमार ने बताया कि अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त विभाग, हरियाणा) की अधिसूचना के अनुसार वर्ष 2020 से पहले नियुक्त क्लर्कों को तीन अतिरिक्त वेतन वृद्धि तथा वर्ष 2020 बैच के क्लर्कों को दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि का लाभ दिया जाना है। लेकिन शिक्षा विभाग में वेतन निर्धारण के कई मामले लंबे समय से लंबित हैं, जिससे पात्र कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। बैठक के दौरान DEO निर्मल दहिया ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अनुभाग अधिकारी (Section Officer) को लंबित मामलों का जल्द निपटारा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वेतन निर्धारण का कार्य तेजी से किया जाएगा ताकि पात्र कर्मचारियों को समय पर लाभ मिल सके। DEO ने यह भी बताया कि जिन कर्मचारियों के आवेदन या केस अभी तक प्राप्त नहीं हुए हैं, उनके लिए सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (BEOs) को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। सभी लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निस्तारण किया जाएगा। बैठक में हेमसा की ओर से राजेश लांबा, कमल चन्द्र सरोहा, कृष्ण रुपाणा और देवेन्द्र सिंह भी उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों से कर्मचारियों के हितों से जुड़े मामलों का जल्द समाधान करने की मांग की, जिस पर विभाग ने सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

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आखिर क्यों दिल्ली कूच पर निकले दिग्विजय चौटाला? जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली|विशेष संवाददाता
आखिर क्यों दिल्ली कूच पर निकले दिग्विजय चौटाला? जानिए पूरा मामला

चंडीगढ़, 23 जुलाई। दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और कथित अत्याचार के विरोध में जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौटाला ने बड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली कूच कर दिया। युवाओं को न्याय दिलाने के लिए अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे दिग्विजय चौटाला अब प्रदर्शनकारी छात्रों के बुलावे पर राजधानी पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि युवा विरोधी भाजपा सरकार को जगाने के लिए जंतर-मंतर पर पक्का धरना दिया जाएगा और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाया जाएगा।वीरवार शाम दिग्विजय चौटाला युवाओं के बड़े काफिले के साथ सिरसा से दिल्ली के लिए रवाना हुए। उन्होंने पूरे हरियाणा के युवाओं से भी दिल्ली पहुंचकर आंदोलन में शामिल होने की अपील की। इससे पहले सिरसा के टाउन पार्क में उनका धरना जारी रहा, जहां यूनिवर्सिटी और कॉलेज के विद्यार्थियों ने पहुंचकर समर्थन दिया और अपने विचार साझा किए। दिग्विजय चौटाला बुधवार रात भी धरना स्थल पर युवाओं के साथ डटे रहे।दिल्ली रवाना होते समय दिग्विजय चौटाला ने कहा कि छात्रों पर हुए अत्याचार के खिलाफ यह लड़ाई अब और तेज होगी। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारी छात्रों से चर्चा के बाद पहले सिरसा में धरना शुरू किया गया था और अब छात्रों के बुलावे पर दिल्ली कूच किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा लगातार सख्ती और धक्कामुक्की की जा रही है, जिससे छात्रों में भारी रोष है। उनका कहना था कि छात्रों के साथ हुई बर्बरता इतिहास में काले अध्याय के रूप में याद की जाएगी।दिग्विजय चौटाला ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल वादों से काम नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि युवा शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार समाधान देने की बजाय छात्रों पर कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को अपना अहंकारी रवैया छोड़ना होगा और युवाओं के संघर्ष के आगे झुकना पड़ेगा।

राष्ट्रीय

दिल्ली जाने से पहले किसानों को क्यों रोका गया? भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बढ़ा नया विवाद

नई दिल्ली|Gia Rana
दिल्ली जाने से पहले किसानों को क्यों रोका गया? भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बढ़ा नया विवाद

भारत-अमेरिका प्रस्तावित ट्रेड डील के विरोध में दिल्ली कूच कर रहे किसानों को पंजाब-हरियाणा सीमा पर प्रशासन ने रोक दिया। किसानों का उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी में पहुंचकर व्यापार समझौते के खिलाफ अपनी आवाज उठाना था। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने सीमा पर बैरिकेडिंग कर किसानों के आगे बढ़ने पर रोक लगा दी। प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने आम लोगों की सुविधा के लिए ट्रैफिक एडवाइजरी भी जारी की है। कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने की संभावना जताई गई है और यात्रियों को वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। पुलिस और प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने तथा जारी ट्रैफिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है। किसानों का कहना है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील से कृषि क्षेत्र और किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उनका आरोप है कि यदि इस प्रकार के व्यापार समझौते बिना व्यापक चर्चा और किसानों की राय के लागू किए गए, तो घरेलू कृषि बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। इसी चिंता को लेकर किसान संगठनों ने दिल्ली में बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित करने का निर्णय लिया। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचने और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। सीमा पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। इस घटनाक्रम के बाद पंजाब-हरियाणा सीमा पर तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रित माहौल बना हुआ है। किसान संगठन अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और सरकार से वार्ता की मांग कर रहे हैं। वहीं प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर देशभर में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समझौतों का कृषि, व्यापार और अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। आने वाले दिनों में सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत इस मुद्दे की दिशा तय कर सकती है। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि विरोध प्रदर्शन और वार्ता का अगला चरण क्या होगा।

राष्ट्रीय

वकीलों की हड़ताल पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट क्यों चिंतित? लीगल एड सिस्टम पर बड़ी टिप्पणी

नई दिल्ली|Gia Rana
वकीलों की हड़ताल पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट क्यों चिंतित? लीगल एड सिस्टम पर बड़ी टिप्पणी

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम (LADCS) को लेकर जारी वकीलों की हड़ताल पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। अदालत ने कहा कि उसे उम्मीद है कि सभी पक्ष समझदारी से काम लेंगे और ऐसा समाधान निकालेंगे जिससे न्यायिक व्यवस्था प्रभावित न हो। अदालत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा लगातार मौजूदा LADCS व्यवस्था का विरोध कर रही है।LADCS (Legal Aid Defence Counsel System) को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त एवं प्रभावी कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। हालांकि, कई वकील संगठनों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था से स्वतंत्र वकालत और पारंपरिक कानूनी प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा का आरोप है कि मौजूदा ढांचे में कई व्यावहारिक और प्रशासनिक कमियां हैं, जिन्हें दूर किए बिना इस प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा सकता। इसी मुद्दे को लेकर कई स्थानों पर वकील विरोध प्रदर्शन और हड़ताल कर रहे हैं।हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि न्यायिक कार्य बाधित होना आम नागरिकों के हित में नहीं है। अदालत ने उम्मीद जताई कि सभी संबंधित पक्ष आपसी संवाद और सकारात्मक सोच के साथ विवाद का समाधान निकालेंगे। न्यायपालिका ने यह भी संकेत दिया कि न्याय तक आम लोगों की पहुंच हर हाल में सुनिश्चित रहनी चाहिए।LADCS का उद्देश्य उन लोगों को गुणवत्तापूर्ण कानूनी सहायता प्रदान करना है जो निजी वकील रखने में सक्षम नहीं हैं। लेकिन इस मॉडल को लेकर बार एसोसिएशनों और कानूनी विशेषज्ञों के बीच लंबे समय से बहस चल रही है। कई विशेषज्ञ इसे न्याय तक पहुंच आसान बनाने वाला कदम मानते हैं, जबकि कुछ इसे मौजूदा वकालत व्यवस्था के लिए चुनौती बताते हैं।फिलहाल इस मामले पर बार काउंसिल, NALSA और न्यायपालिका के बीच चर्चा जारी है। आने वाले दिनों में इस विवाद पर कोई महत्वपूर्ण निर्णय या नई व्यवस्था सामने आ सकती है। सभी की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि बातचीत के जरिए इस गतिरोध का समाधान कैसे निकलेगा और न्यायिक व्यवस्था को सुचारु रूप से कैसे बनाए रखा जाएगा।

राष्ट्रीय

आखिर छात्रों के समर्थन में क्यों उतरे बॉलीवुड सितारे? दिलजीत दोसांझ और शबाना आजमी ने क्या कहा?

नई दिल्ली|Gia Rana
आखिर छात्रों के समर्थन में क्यों उतरे बॉलीवुड सितारे? दिलजीत दोसांझ और शबाना आजमी ने क्या कहा?

दिल्ली में छात्रों के विरोध प्रदर्शन और उसके बाद हुई हिंसक झड़पों के बीच अब बॉलीवुड और संगीत जगत की कई प्रमुख हस्तियां छात्रों के समर्थन में खुलकर सामने आई हैं। अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ, वरिष्ठ अभिनेत्री शबाना आजमी समेत कई कलाकारों ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों की आवाज़ सुनने और उनके साथ संवाद स्थापित करने की अपील की है।दिलजीत दोसांझ ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि छात्रों की बात को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने शांतिपूर्ण संवाद और लोकतांत्रिक तरीके से समस्याओं के समाधान पर जोर दिया। वहीं शबाना आजमी ने भी छात्रों की चिंताओं को नजरअंदाज न करने की सलाह देते हुए कहा कि लोकतंत्र में संवाद ही सबसे बड़ा रास्ता है।दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की खबरें सामने आई थीं। इस घटना में कई छात्र घायल हुए, जिसके बाद देशभर में इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई। सोशल मीडिया पर भी छात्रों के समर्थन में बड़ी संख्या में लोग अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।कई अन्य कलाकारों, लेखकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन कर रहे छात्रों के पक्ष में अपनी राय रखी है। उनका कहना है कि शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकार और संबंधित संस्थाओं को खुलकर बातचीत करनी चाहिए ताकि किसी भी तरह के तनावपूर्ण माहौल से बचा जा सके।हालांकि, सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की हिंसा स्वीकार नहीं की जा सकती। वहीं प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा, जिसके कारण उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ा।इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, छात्रों के अधिकार और लोकतांत्रिक विरोध की सीमाओं को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सभी पक्ष बातचीत का रास्ता अपनाते हैं तो विवाद का शांतिपूर्ण समाधान संभव है।फिलहाल इस मामले पर राजनीतिक, सामाजिक और फिल्म जगत की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। आने वाले दिनों में सरकार और छात्र संगठनों के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। इस मामले से जुड़े हर बड़े अपडेट के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।

राष्ट्रीय

NEET पेपर लीक में कौन होगा सजा का हकदार? पीएम मोदी ने छात्रों से किया बड़ा वादा

नई दिल्ली|Gia Rana
NEET पेपर लीक में कौन होगा सजा का हकदार? पीएम मोदी ने छात्रों से किया बड़ा वादा

NEET पेपर लीक मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा संदेश देते हुए कहा है कि इस पूरे प्रकरण में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। एनडीए संसदीय दल की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने सांसदों से कहा कि सरकार छात्रों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में मौजूद सांसदों से कहा कि छात्रों और उनके परिवारों को यह भरोसा दिलाना जरूरी है कि सरकार उनके भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।NEET पेपर लीक मामले ने देशभर में लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी थी। परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर उठे सवालों के बाद कई राज्यों में जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है। मामले की जांच के दौरान कई गिरफ्तारियां भी हुई हैं और विभिन्न एजेंसियां पूरे नेटवर्क की जांच कर रही हैं।प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद यह स्पष्ट संकेत मिला है कि केंद्र सरकार इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है। उन्होंने सांसदों से छात्रों के बीच सकारात्मक संदेश पहुंचाने की अपील की और कहा कि सरकार हर दोषी को कानून के दायरे में लाएगी।सरकार का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित तथा पारदर्शी बनाया जाएगा। इसके लिए तकनीकी सुधार, निगरानी व्यवस्था और कड़े कानूनी प्रावधानों पर भी काम किया जा रहा है।NEET परीक्षा देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है, जिसमें हर वर्ष लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर शामिल होते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं न केवल छात्रों के भविष्य को प्रभावित करती हैं बल्कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती हैं।फिलहाल जांच एजेंसियां मामले की गहराई से जांच कर रही हैं और आने वाले समय में इस केस से जुड़े कई अहम खुलासे होने की संभावना है। सरकार ने दोहराया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और छात्रों के हितों की हर कीमत पर रक्षा की जाएगी।

राष्ट्रीय

दिल्ली में आखिर ऐसा क्या हुआ? घायल डॉक्टरों से मिले नड्डा, राहुल गांधी भी पहुंचे अस्पताल

नई दिल्ली|Gia Rana
दिल्ली में आखिर ऐसा क्या हुआ? घायल डॉक्टरों से मिले नड्डा, राहुल गांधी भी पहुंचे अस्पताल

दिल्ली में CJP (Confederation of Junior Professionals/Doctors Protest) के विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प की खबरें सामने आईं। प्रदर्शन के बाद कई डॉक्टरों और प्रदर्शनकारियों के घायल होने की सूचना मिली, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में भर्ती कराया गया।घटना के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा अस्पताल पहुंचे और घायल डॉक्टरों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने डॉक्टरों को बेहतर इलाज का भरोसा दिलाते हुए अस्पताल प्रशासन से भी स्थिति की जानकारी ली। इस मुलाकात के बाद मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।वहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी अस्पताल जाकर घायल डॉक्टरों और प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की। उन्होंने घटना पर चिंता जताई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। राहुल गांधी ने घायलों का हाल जाना और उनकी समस्याओं को सुना।इस बीच CJP के नेता अभिजीत दिपके ने प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा पर दुख जताते हुए अपने समर्थकों से माफी मांगी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग किया, जिससे कई लोग घायल हुए। हालांकि पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई।दिल्ली में हुए इस विरोध प्रदर्शन ने एक बार फिर पुलिस कार्रवाई, डॉक्टरों की सुरक्षा और प्रदर्शन के अधिकार को लेकर बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से ट्रेंड कर रहा है और लोग इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।फिलहाल घायलों का इलाज जारी है और प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है। आने वाले दिनों में इस घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और जांच रिपोर्ट सामने आने की संभावना है। इस मामले से जुड़े हर बड़े अपडेट के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।

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