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हरियाणा में रिश्वतखोर पटवारी गिरफ्तार, 90 हजार रुपए की मांगी थी रिश्वत

Haryana ACB arrests Ganaunr Patwari Sachin taking 90000 bribe for bank loan entry in revenue record, Sonipat corruption news.

Haryana ACB arrests Ganaunr Patwari Sachin taking 90000 bribe for bank loan entry in revenue record, Sonipat corruption news.

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adminगन्नौर, सोनीपत, 5 अक्टूबर 2026, (अपडेटेड 11:54 am)

हरियाणा में इन दिनों रिश्वतखोर अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है. अलग-अलग जिलों में कार्रवाई करते हुए ACB की टीम ऐसे लोगों को गिरफ्तार करने में लगी है जो आम जनता को परेशान करने का काम कर रहे हैं. ऐसे ही एक मामला सामने आया है सोनीपत के गन्नौर से जहां ACB की टीम ने ऐसे सरकारी अधिकारी को गिरफ्तार करने मे कामयाबी हासिल की है जिसने 90 हजार रुपए की रिश्वत की मांग थी.

Patwari Taking Bribe In Haryana
Patwari Taking Bribe In Haryana
दरअसल, गन्नौर में 90 हजार की रिश्वत लेते हुए एक पटवारी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है. आरोपी पटवारी पर आरोप लगा है कि एक कंपनी के बैंक लोन को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाने के लिए पटवारी ने रिश्वत की मांग की थी. जिसको लेकर शिकायकर्ता ने भिवानी ACB की टीम को इसकी जानकारी दी. जिसके बाद पटवारी को रंगेहाथ पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया था.

ACB की टीम ने शिकायतकर्ता को गन्नौर तहसील में 90 हजार लेकर जाने के लिए कहा जैसे ही उसने ये रकम पटवारी को दी दो टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया और आरोपी को गन्नौर थाने में ले जाया गया. जहां आरोपी के खिलाफ कार्रवाई जारी है.

ACB की टीम ने जानकारी देते हुए बताया कि जब भी कोई कंपनी या व्यक्ति अपनी संपत्ति पर बैंक से ऋण (Loan) लेता है, तो कानूनन यह अनिवार्य होता है कि उस संपत्ति के आधिकारिक राजस्व रिकॉर्ड यानी फर्द और इंतकाल में उस बैंक ऋण की प्रविष्टि (Entry) दर्ज कराई जाए। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि संबंधित संपत्ति पर बैंक का वित्तीय हित सुरक्षित रहे और कोई भी व्यक्ति बैंक की अनुमति या जानकारी के बिना उस संपत्ति को आगे न बेच सके। यह एक सामान्य प्रशासनिक और विधिक प्रक्रिया है, जिसे पूरा करना संबंधित हल्के के पटवारी और राजस्व विभाग के अधिकारियों का प्रशासनिक दायित्व होता है, जिसके लिए किसी भी प्रकार के अतिरिक्त शुल्क या रिश्वत का कोई प्रावधान नहीं है।

दो लाख से शुरू हुआ था सौदा, विजिलेंस ने बिछाया जाल

भिवानी एंटी करप्शन ब्यूरो के इंस्पेक्टर जगजीत सिंह द्वारा दी गई विस्तृत जानकारी के मुताबिक, इस मामले में आरोपी पटवारी की पहचान सचिन के रूप में हुई है, जो मूल रूप से गांव उमेदगढ़ का रहने वाला है और वर्तमान में गन्नौर तहसील में पटवारी के पद पर तैनात है। शुरुआती बातचीत के दौरान आरोपी सचिन ने कंपनी के प्रतिनिधि से इस सामान्य सी एंट्री को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने के एवज में पूरे 2 लाख रुपए की भारी-भरकम रिश्वत की मांग की थी। हालांकि, आपसी मोलभाव और बातचीत के बाद यह सौदा 1 लाख रुपए में तय हुआ था। इस अवैध मांग से तंग आकर कंपनी के प्रतिनिधि ने चुपचाप भिवानी स्थित एसीबी कार्यालय से संपर्क किया और पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद विभाग ने तुरंत एक विशेष जांच दल का गठन किया।
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रंगेहाथ गिरफ्तारी और आगामी कानूनी कार्रवाई

शिकायत का सत्यापन होने के बाद एसीबी की टीम ने पूरी सावधानी के साथ एक गुप्त योजना तैयार की। योजना के तहत शिकायतकर्ता को रासायनिक लगे हुए नोटों के साथ गन्नौर तहसील परिसर भेजा गया। जैसे ही शिकायतकर्ता ने आरोपी पटवारी सचिन को 90 हजार रुपए की यह रिश्वत की रकम सौंपी, पहले से ही आसपास सादे कपड़ों में तैनात एसीबी की दो टीमों ने तुरंत दबिश दी और उसे मौके पर ही दबोच लिया। आरोपी के कब्जे से रिश्वत के पूरे पैसे भी बरामद कर लिए गए हैं। गन्नौर थाने में आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे अदालत में पेश किया जाएगा।

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